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उत्तर प्रदेशबस्ती

सदर ब्लॉक में भ्रष्टाचार का ‘वाटर एटीएम’ कांड: 25 लाख की लागत से लगा आरओ प्लांट, 100 लीटर पानी भी नहीं दे पाया

'100' लीटर पानी की कीमत '25' लाख: सदर ब्लॉक में भ्रष्टाचार की नई इबारत विकास के नाम पर सरकारी लूट: श्मशान घाट पर लगा आरओ प्लांट बना सफेद हाथी

अजीत मिश्रा (खोजी)

​’शुद्ध’ पानी के नाम पर ‘अशुद्ध’ भ्रष्टाचार: 100 लीटर पानी की कीमत 25 लाख!

  • प्यासे को पानी पिलाने के नाम पर ‘खेल’, 25 लाख फूँककर भी जनता प्यासी
  • सदर ब्लॉक में ‘वॉटर एटीएम’ घोटाला: उद्घाटन के 6 दिन बाद ही बंद हुआ प्लांट
  • सुरक्षा को ताक पर रखकर भ्रष्टाचार: श्मशान घाट पर खुले बिजली के तारों से जानलेवा खतरा
  • पूर्ववर्ती अध्यक्षों के पदचिन्हों पर ब्लॉक प्रमुख: पानी के नाम पर सरकारी धन की खुली बर्बादी

बस्ती। क्या आपने कभी सोचा है कि एक ग्लास पानी की कीमत क्या हो सकती है? शायद कुछ पैसे। लेकिन हमारे जिले के सदर ब्लॉक में पानी की कीमत करोड़ों में नहीं, बल्कि ‘अंधेरगर्दी’ में मापी जा रही है। मामला प्रशासनिक संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार का एक जीता-जागता प्रमाण है, जहाँ श्मशान घाट पर प्यासे को पानी पिलाने के नाम पर सरकारी धन की निर्मम हत्या की गई है।सदर ब्लॉक में प्यासे को पानी पिलाने के नाम पर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। सरकारी धन का उपयोग जनकल्याण के लिए करने के बजाय, इसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया है। श्मशान घाट पर लगाए गए आरओ प्लांट के नाम पर लाखों रुपये का वारा-न्यारा किया गया है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि यह प्लांट महज 20 दिनों में ही दम तोड़ चुका है।

​विकास के नाम पर ‘विनाश’ की कहानी

​सदर ब्लॉक में केंद्रीय वित्त आयोग की निधि से श्मशान घाट पर एक आरओ (RO) प्लांट लगाया गया। दावा था कि अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों को ठंडा पानी मिलेगा। लेकिन हकीकत क्या है? मात्र 20 दिन पहले लगा यह प्लांट आज बंद पड़ा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस प्लांट से मुश्किल से 100 लीटर पानी लोगों को नसीब हुआ होगा। गणित लगाइए—यदि 100 लीटर पानी के लिए 25 लाख रुपये फूंक दिए गए, तो प्रति लीटर पानी की कीमत क्या हुई? यह विकास नहीं, बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई का खुला अपमान है।

​मौत को दावत देता ‘विकास’

​भ्रष्टाचार की हद तो तब हो गई जब प्लांट के तार खुले छोड़ दिए गए। वहां न तो टैप लगे हैं और न ही सुरक्षा की कोई व्यवस्था है। बिजली के खुले तार किसी भी दिन एक बड़ी दुर्घटना को निमंत्रण दे सकते हैं। एक तरफ प्यासे को पानी नहीं मिल रहा, दूसरी तरफ जो वहां जा रहा है, वह अपनी जान जोखिम में डाल रहा है। यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं तो और क्या है? क्षेत्र पंचायत सदर द्वारा केंद्रीय वित्त आयोग की निधि से श्मशान घाट पर एक आरओ वाटर प्लांट का उद्घाटन सदर ब्लॉक प्रमुख राकेश श्रीवास्तव द्वारा किया गया था। हालांकि, उद्घाटन के दौरान इस प्लांट की वास्तविक लागत को जानबूझकर छिपाया गया, ताकि जनता को इस बड़े आर्थिक गोलमाल का पता न चल सके।

घोटालों की मुख्य बातें:

  • अत्यधिक लागत और नगण्य उपयोग: 25 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च करने के बावजूद, यह प्लांट मुश्किल से 100 लीटर पानी ही लोगों को पिला पाया है।
  • काम में भारी लापरवाही: प्लांट लगने के छठे दिन ही पानी मिलना बंद हो गया। बोरिंग, पानी की टंकी, और ठंडा करने वाली मशीन लगाने के बाद भी लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है।
  • सुरक्षा से खिलवाड़: प्लांट के तार नंगे छोड़ दिए गए हैं, जिस पर टैप (नल) तक नहीं लगाए गए। यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि श्मशान घाट पर आने वाले लोगों के लिए एक गंभीर बिजली दुर्घटना का खतरा भी बन गया है।

​क्या यह केवल एक संयोग है?

​इतिहास गवाह है कि इससे पहले भी नगर पालिका में वॉटर कूलर और वॉटर एटीएम के नाम पर घोटाले हुए हैं। पूर्व अध्यक्षों के कार्यकाल में हुए घोटालों से सबक लेने के बजाय, सदर ब्लॉक के प्रमुख राकेश श्रीवास्तव उन्हीं के पदचिन्हों पर चलते हुए दिखाई दे रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर ये “पानी के घोटाले” कब तक चलते रहेंगे? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को कभी इस फिजूलखर्ची का हिसाब देना पड़ेगा या फिर पत्थर पर नाम लिखवाकर अपनी ‘उपलब्धि’ दर्ज कराने का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा?यह क्षेत्र में पानी के नाम पर हुआ कोई पहला घोटाला नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इससे पहले भी नगर पालिका में वॉटर कूलर और वॉटर एटीएम के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला हो चुका है।

जानकारों का मानना है कि जो लोग पहले इन घोटालों में शामिल थे, सदर ब्लॉक प्रमुख राकेश श्रीवास्तव भी उन्हीं की कार्यशैली पर चल रहे हैं। इस पूरे प्रकरण में यह साफ है कि सरकारी धन का उपयोग जनहित के लिए नहीं, बल्कि कमीशनखोरी के लिए किया गया है।

जनता का सवाल: क्या श्मशान घाट पर पानी का प्लांट लगाना वाकई जनहित का कार्य था, या फिर सरकारी खजाने को खाली करने का एक और ‘सफेदपोश’ तरीका? प्रशासन को जवाब देना होगा।

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